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सभी भक्तो माताबहनों से निवेदन है कि मानव सनातन संस्कृति दिन प्रतिदिन कमजोर क्यों होती जारही है नकारात्मकता बढती जारही है सकारात्मकता कम होती जारही है इस पर संत श्री रामदासजी महाराज (पुनासर) ने क्ई बड़े बड़े यज्ञ किए फिरभी सकारात्मकता नहीं बढ़ी तो यज्ञों के साथ साथ गत बत्तीस वर्षों से अनुसंधान कर इस नतीजे पर पहूंचे कि हिन्दू सनातन धर्म को मानने वालों ने अपने उपासना केन्द्रों ( मंदिरों ) में या अन्य स्थानों पर जो देवी देवताओं की फोटू, मूर्तिया स्थापित करके पूजा कररहे हैं , जिन वेद मंत्रों का पठन पाठन जप किए जारहे हैं जिस प्रणाली से यज्ञ किए जारहे हैं जिनसे प्रचुर मात्रा में जो उर्जा पैदा हो रही है वो अधिकांस शास्त्र प्रमाण से सही नहीं हो रहे (रही)हैं इसलिए नकारात्मक उर्जा पैदा होने के कारण नकारात्मकता बढ़रही है क्योंकि सारा फल देने का संचालन प्रकृति ही करती है जैसी उर्जा मनुष्य पैदा करते है प्रकृति वैसा ही फल देती हैं नकारात्मक ऊर्जा पैदा करने पर नकारात्मक ओर सकारात्मक ऊर्जा करने पर सकारात्मक फल देती है।